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भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी रहेगी, इस साल 7.6% रहने के आसार : विश्वबैंक

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वेब डेस्क
वरिष्ठ संवाददाता, भोपाल
📅 30 नवम्बर -0001
🕐 12:00 AM
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वाशिंगटन:
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4 अक्टूबर 2016, विश्वबैंक ने दक्षिण एशिया को वैश्विक वृद्धि का प्रमुख केंद्र बताया और कहा कि भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर मजबूत रहेगी और 2016 में इसके 7.6 प्रतिशत तथा 2017 में 7.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है. 'साउथ एशिया इकोनामिक फोकस' पर जारी अपनी ताजा रिपोर्ट में विश्वबैंक ने कहा, कृषि क्षेत्र में तेजी की उम्मीद, वेतन वृद्धि से खपत में बढ़ोतरी, निर्यात से सकारात्मक योगदान तथा निजी निवेश में सुधार की उम्मीद से भारत में जीडीपी वृद्धि 2016 में 7.6 प्रतिशत तथा 2017 में 7.7 प्रतिशत रहेगी. दो साल पर जारी होने वाली रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि भारत के समक्ष वृद्धि के साथ गरीबी में तेजी से कमी लाने, समावेशी विकास को बढ़ावा तथा स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा में सुधार एवं महिलाओं-पुरूषों में असमानता को दूर करने की चुनौती भी है. रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण एशिया वैश्विक वृद्धि के लिहाज से प्रमुख केंद्र बना हुआ है और इसने चीन में नरमी, विकसित देशों में प्रोत्साहन नीति को लेकर अनिश्चितता तथा धन प्रेषण की गति धीमी होने जैसे वैश्विक प्रतिकूल हालात के बीच भी अपनी मजबूती को दिखाया है. मुख्य चुनौती घरेलू स्तर पर बनी हुई है जिसमें नीतियों में अनिश्चितता के साथ राजकोषीय तथा वित्तीय स्थिति का नाजुक होना शामिल हैं. रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में मध्यम अवधि में आर्थिक गतिविधियों में धीरे-धीरे तेजी आने का अनुमान है और 2017 में जीडीपी वृद्धि 5.0 प्रतिशत तथा 2018 में 5.4 प्रतिशत रहेगी. वर्ष 2016 में इसके साधन लागत पर 4.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है :बाजार मूल्य पर 5.7 प्रतिशत:। विश्वबैंक ने कहा कि आतंरिक और बाह्य चुनौतियों के बावजूद बांग्लादेश में वृद्धि मजबूत बनी हुई है. वहां वृद्धि 2017 में 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो 2016 में 7.1 प्रतिशत के अनुमान से कम है. भारत के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक वृद्धि पूर्व की तरह मजबूत बनी हुई है और इससे निरंतर गरीबी में कमी में मदद मिलने की उम्मीद है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्थाओं में अंतर और कम होने की उम्मीद है. जीएसटी के पारित होने जैसी प्रोत्साहन वाली नीतियों तथा वेतन वृद्धि के साथ अच्छे मॉनसून से इसे मदद मिलेगी. हालांकि इसमें यह भी कहा गया है कि भारत के समक्ष वृद्धि के साथ गरीबी में तेजी से कमी लाने, समावेशी विकास को बढ़ावा देने तथा स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा में सुधार एवं महिला-पुरुषों में असमानता को दूर करने की चुनौती है जहां भारत की रैंकिंग अच्छी नहीं है. विश्वबैंक ने भारत के लिए वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं को भी रेखांकित किया है जिसमें जिंसों के दाम में उतार-चढ़ाव, ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने से विश्व व्यापार पर उसका प्रभाव तथा चीनी अर्थव्यवस्था में आगे और नरमी से बाह्य मांग में पुनरूद्धार में विलम्ब हो सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, इसके अलावा सरकार ने विनिवेश तथा स्पेक्ट्रम नीलामी से राजस्व में वृद्धि का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. अगर यह लक्ष्य पूरा नहीं होता है, इससे वृद्धि को गति देने वाली पूंजी तथा सामाजिक व्यय में कटौती हो सकती है ताकि राजकोषीय लक्ष्यों को हासिल किया जा सके. ऐसा नहीं होने पर राजकोषीय लक्ष्य हासिल नहीं हो पाएगा. निजी निवेश का जिक्र करते हुए इसके बारे में कहा गया है कि इसके समक्ष नियामकीय और नीतिगत चुनौतियां हैं. इसके अलावा वित्तीय क्षेत्र में दबाव भी चिंता का कारण है. रिपोर्ट के अनुसार, अगर इन बाधाओं को दूर नहीं किया गया तो कमजोर निजी निवेश भारत की संभावित वृद्धि को नीचे ले जा सकता है.
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