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अगले वर्ष तक मध्यप्रदेश में खुलेंगे 150 प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र

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वेब डेस्क
वरिष्ठ संवाददाता, भोपाल
📅 30 नवम्बर -0001
🕐 12:00 AM
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भोपाल
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भोपाल 1 अक्टूबर 2016, प्रधानमंत्री जन औषधि योजना का अब मध्यप्रदेश में तेजी से विस्तार होगा। योजना के तहत प्रदेश में सरकारी अस्पतालों व स्वास्थ्य केन्द्रों के नजदीक मार्च 2017 तक लगभग 150 जन औषधि केन्द्र खोले जाएंगे। फार्मेसी विद्यार्थियों व एनजीओ से लेकर चिकित्सक तक सभी पात्र उम्मीदवार इन केन्द्रों को खोल सकेंगे। योजना के तहत शुरूआती मदद के रूप में 2.5 लाख रूपए तक के विभिन्न लाभ इन केन्द्रों को खोलने पर मिलेंगे। इस योजना की और अधिक जानकारी देने के उद्देश्य से आज स्थानीय मोटल शिराज में पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स तथा केन्द्र सरकार के औषधि विभाग द्वारा एक दिवसीय सेमीनार आयोजित किया गया। इस सेमीनार को पीएचडी चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स, नईदिल्ली के डायरेक्टर श्री विवेक सेगल, केन्द्रीय औषधि विभाग, बीपीपीआई, के निदेशक श्री सुनील कुमार, प्रधानमत्री जन औषधि योजना के लिए गठित टास्कफोर्स के अध्यक्ष डॉ. विजय कुमार तथा मध्यप्रदेश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन के संयुक्त संचालक श्री राकेश मुंशी ने संबोधित किया। विवेक सेगल ने बताया कि मार्च 2017 तक मध्यप्रदेश में लगभग 150 प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र खोले जाएंगे। इससे जहां एक ओर गरीबों को सस्ती दवाएं मिल सकेंगी तो वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों में दवाओं की किल्लत कम होगी। सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी होने पर इन केन्द्रों से बिना किसी टेंडर दवाएं खरीदकर मरीजों को मुहैया कराई जा सकेंगी। राकेश मुंशी ने बताया कि अस्पतालों की मरीज कल्याण समिति की बंद पड़ी दुकानों को भी इन केन्द्रों को खोलने में उपयोग में लिया जाएगा। डॉ. विजय कुमार ने बताया कि केन्द्र सरकार फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया तथा पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स व राज्य सरकारों की फार्मा काउंसिलों के साथ मिलकर फार्मा क्षेत्र के लिए स्किल काउंसिल की स्थापना पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य फार्मेसी के विद्यार्थियों के कौशल को बढ़ाना तथा उन्हें रिसर्च व अन्य क्षेत्रों में मौजूद रोजगारों के अवसरों के अनुरूप बनाना रहेगा। साथ ही इस बात पर भी निर्णय लिया जाएगा कि फार्मासिस्टों को सामान्य दवाएं लिखने का अधिकार मिले। कर्यक्रम के अंत में मध्यप्रदेश पीएचडी चैम्बर के रेसीडेंट डायरेक्टर आर.जी. द्विवेदी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।
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